Sunday, August 21, 2011

शाकाहारी जीवन


बना  रहे  ये  प्रकृति  संतुलन, कैसे,
आओ  करें  इसका  आंकलन.
परमात्मा  ने  नर-नारी  के  साथ, लता  और  वृक्ष  उगाये,
चींटी  से  लेकर  हाथी  तक  जीव-जंतु  सारे  उपजाए.

पर  मनुष्य  बन  गया  राक्षस,
मार  खा  रहे  निर्बल  प्राणी.
जीने  का  अधिकार  छीन कर  इन  सबका,
करते  हैं  ये  मनमानी.

सावधान! सावधान  तुम  खूब  समझ  लो,
प्रकृति  संतुलन  सम  रहने  दो.
प्रभु  की  चेतावनी  धार  को,
कभी  ना  विषम  गति  से  बहने  दो. 

जियो और  जीने  दो  सबको,
तभी  सुखी  तुम  रह  पाओगे.
जीने  का  अधिकार  जंतु  का  छीनोगे,
तो  मिट  जाओगे |

Friday, March 25, 2011

ख़ूनी खेल


वो  अँधेरी  काली  रात, ना जाने  कितनो  को  अपने  अन्दर  समाने  आई  थी,
उस  काली  रात  का  तांडव , ना  जाने  कितनो  की  आँखों  में  आंसू  लाई  थी |
ना  जाने  क्यों  ना  हुआ  उस  दिन  कोई  चमत्कार ,
समझ  न  आया  होने  वाला  है  इतना  बड़ा  नरसंघार|.
उन  दस  आतंकवादियों  ने  बनाया  था  मुंबई  को  निशाना ,
बर्बाद  कर  दिया  ताज , ओबेरॉय  जो था  जाना  पहचाना |
जल  मार्ग  से  आये  थे  ये  आतंकवादी  और  समझा  दिया   हमे ,
बेकार  हैं  ये  नेता  और  इनकी  नेतागरी |
बहुत  आगे  हैं  ये  आतंकवादी  हमसे ,
मुंबई  को  बर्बाद  करने  का  इरादा  ना  जाने  लिए  बैठे  थे  कबसे ?
कुल  दस  आतंकवादियों  से  बना  था  इनका  गुट ,
अलग थे  रास्ते , मकसद  था  एक , और  थे  वे  एक  जुट |
उनकी  एकजुटता  ने  सारा  आलम  हिला  डाला ,
उनकी  बरसती  गोलियों  ने , ना  जाने  कितनो  को  मौत  के   घाट  उतर  डाला |
नौसेना  से  बचते -बचाते  पहुचे  थे  वो  मुंबई  में ,
फिर  पहुचे  ताज , ओबेरॉय  और  कई  Hospitals  में |
बड़े -बड़े  ऑफिसर  भी  जब  बने  उनकी  गोली  का  शिकार ,
तो  कैसे  ना  मचता  इतना  हाहाकार |
उनकी  गोली  ने  कहाँ  देखा  हिन्दू  या  मुस्लमान ,
मुंबई  को  नषट  करने  में , समझते  थे  खुद  की  शान |
पर हमारे  बहादुर  NSG  कमांडरो ने , दिखाई  ऐसी  बहादुरी , 
दोस्त  या  दुश्मन  हर  कोई  करे , उनकी  प्रशंसा  भूरी  भूरी |
लगभग  साठ  घंटे  चलने  वाली  लड़ाई  हुई  थी  खत्म ,
दस  में  से  नौ  आतंकवादियों  का  हुआ  था  अंत |
एक  कसाब  ही  था  जो  अंत  में  पकड़ा  गया ,
उसने  भी  सच  उगलने  में , सबकी  नाक  में  दम  किया
अभी  तक  नहीं  हुआ  है  फैसला  कसाब  के  केस  का ,
लगता  है  इंतज़ार  है  सरकार  को  ऐसे  एक  और  ख़ूनी  खेल  का |

Monday, January 3, 2011

टूटा दिल

तुम  दूर  सही , मजबूर  सही ,
पर  याद  तुम्हारी  आती  है |
तुम  बद्दुआ  मुझे  इतने  दिल  से  देते  हो ,
कि  वो  असर  यहाँ  तक  दिखा  जाती  हैं |

ना  जाने  क्या  कुछ  सहा  तुम्हारे  लिए ,
बिना  बताये  क्या  नहीं  किया  तुम्हारे  लिए |
बिन  बोले  तुम्हे  कितना  कुछ  समझाना  चाहा  ,
पर  तुमने  मुझे  कभी  समझना  ही  नहीं  चाहा |

तुम  तो  इतने  खुदगर्ज  निकले ,
अपना  काम  ना होते  देख , मुझे  ही  अपनी  दुनिया  से  निकल  दिया |
क्या  कभी  नहीं  सोचा  तुमने ,
इस  सब  के  बाद , क्या  दुनिया  ने  मेरा  हाल  किया ?

ऐसा  क्या  गुनाह  किया ,
जो  इतनी  बड़ी  सजा  मिली |
मौत  भी  ऐसी  नाराज़  हुई ,
कि  अब  वो  भी  मुझको  नहीं  मिली |

कितना  प्यार  करते  हैं  तुमसे ,
काश ! तुम्हे  यह  एहसास  हो  जाये |
मगर  ऐसा  ना  हो , कि  आप  होश  में  तब  आये ,
जब  हम  गहरी  नींद  में  सो  जाये |

Thursday, December 30, 2010

LIFE...

Everyone has his own thoughts about life.
Small kid playing with toys says,
Life is fun. 
An adult says,
A moment of mixed feelings is life.
Poor man shivering in cold says,
Life is full of troubles.
Rich man happily says,
Money is life. 
A worker says,
Life is hard work.
Begger says,
Hunting for food is life.
A solider standing in battlefield says,
Life is battlefield.
A sparrow flying freely in sky says,
Freedom is life. 
A helpless bird in a cage says,
Life is bondage. 
Waiting in loneliness for his beloved, a lover says,
Waiting eagerly for beloved is life.
A saint in his speech says,
Life is way to get God.
And I say Life is an unsolved mystery,
The solution of which we seek according to our thoughts.